छत्तीसगढ़/अम्बिकापुर। युवा कांग्रेस आरटीआई सेल छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष हिमांशु जायसवाल एवं विश्वविद्यालय अध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा शुल्क एवं अन्य शैक्षणिक सेवाओं के शुल्क में की गई भारी वृद्धि का कड़ा विरोध करते हुए इसे छात्र विरोधी एवं आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों के साथ अन्यायपूर्ण निर्णय बताया एवं ज्ञापन सौंपा है।
हिमांशु जायसवाल ने कहा कि संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय से सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर एवं जशपुर जैसे आदिवासी एवं आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों के हजारों विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। इन क्षेत्रों के अधिकांश छात्र किसान, मजदूर एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों से आते हैं। ऐसे में परीक्षा शुल्क में लगभग दोगुनी वृद्धि करना विद्यार्थियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने जैसा है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने बी.ए., बी.कॉम., बी.एससी., बी.सी.ए., बी.बी.ए. सहित विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के परीक्षा शुल्क में भारी वृद्धि की है। इसके साथ ही पीएचडी कोर्सवर्क, शोध प्रबंध, माइग्रेशन, अंकसूची, डुप्लीकेट दस्तावेज़ तथा अन्य शैक्षणिक सेवाओं के शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर हजारों विद्यार्थियों पर पड़ेगा।
हिमांशु जायसवाल ने सवाल उठाया कि जब विश्वविद्यालय आज भी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं करा पाया है, तब शुल्क वृद्धि का औचित्य क्या है? आज भी विश्वविद्यालय में डिजिटल सुविधाओं का अभाव है, विद्यार्थियों के लिए समुचित ऑनलाइन व्यवस्था एवं मोबाइल ऐप उपलब्ध नहीं है, पुस्तकालयों में नवीन पुस्तकों की कमी है, प्रयोगशालाओं में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, छात्रावासों की व्यवस्था सीमित है तथा परीक्षा परिणामों में अनावश्यक विलंब जैसी समस्याएँ लगातार बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) का उद्देश्य शिक्षा को अधिक सुलभ एवं समावेशी बनाना है, जबकि विश्वविद्यालय का यह निर्णय शिक्षा को आर्थिक रूप से और अधिक कठिन बना रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर एवं आदिवासी अंचल के अनेक विद्यार्थियों के लिए यह शुल्क वृद्धि उच्च शिक्षा जारी रखना कठिन बना सकती है।
युवा कांग्रेस ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि परीक्षा शुल्क एवं अन्य शैक्षणिक शुल्कों में की गई वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए। भविष्य में यदि शुल्क संशोधन आवश्यक हो तो छात्र संगठनों, महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों एवं संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद ही निर्णय लिया जाए। साथ ही आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष शुल्क रियायत लागू की जाए तथा विश्वविद्यालय की आय-व्यय एवं शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
हिमांशु जायसवाल ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन शीघ्र ही इस छात्र विरोधी निर्णय को वापस नहीं लेता है, तो छात्रहित में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण जनआंदोलन प्रारंभ किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने वालों में विश्वविद्यालय अध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष गौतम गुप्ता, सचिव प्रमोद जायसवाल,सत्यम यादव, आयुष गुप्ता, अभिनव काशी, आदि उपस्थित हुए