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फर्जी वन अधिकार पट्टा का गोरख धंधा


छत्तीसगढ़/मुंगेली : प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव से विधानसभा क्षेत्र मुंगेली जिले के वनग्रामों में वन अधिकार पट्टों के मामले में एक बेहद गंभीर बड़े साजिश का खुलासा हो रहा है। जी हां जिले के लोरमी ब्लॉक के खुड़िया वनग्राम में ग्रामीणों से पैसे लेकर उन्हें फर्जी तरीके से जमीन के पट्टे दिए जा रहे है।पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब इस मामले में  सूचना के अधिकार के तहत जानकारी जुटाई गई।क्या है पूरा मामला देखिए इस खबर में।


 हाथों में जमीन के पट्टो की कागजात दिखाते ग्रामीण,वन ग्रामों में जमीन की घेराबंदी का नजारा और पूरे मामले का खुलासा करते ये डाक्यूमेंट्स जी मुंगेली जिले के लोरमी विधानसभा क्षेत्र  का जो प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव का चुनावी क्षेत्र है । जहां के खुड़िया वन क्षेत्र में महज कुछ हजारों में लोगों को वन अधिकार के पट्टे दिए जा रहे है। ये सब कुछ हो रहा है शासन के नाक के नीचे।


 इस मामले पर आरटीआई के तहत जो जानकारी निकाली गई है उसके मुताबिक इस क्षेत्र में कुल 218 शासकीय पट्टे सरकार की ओर से अब तक जारी किए गए है।जिनमें से 12 पट्टे पूर्व में निरस्त होने के बाद 206 पट्टाधारी ही शेष बचते है। लेकिन जमीन पर कहानी दूसरी है यहां  206 वैध पट्टाधारियों के अलावा सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पट्टे दिखा रहे हैं।जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा स्थानीय गरीब आदिवासियों को शासकीय भूमि का पट्टा दिलाने का झांसा दिया जा रहा है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि इन भोले-भाले परिवारों से कथित तौर पर 30  से 50 हजार रुपये या उससे अधिक की राशि लेकर फर्जी और अवैध पट्टे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।इस पूरे मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर पहलू भी सामने आया है। 



शिकायतकर्ताओं के अनुसार  यह अंदेशा और आरोप लगाया गया है कि ग्रामीणों को बांटे गए ये कथित फर्जी पट्टे आधुनिक तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) के माध्यम से जनरेटेड या तैयार किए गए प्रतीत होते हैं। यदि पुलिस और प्रशासन की जांच में इस बात की पुष्टि होती है, तो यह न केवल एक गंभीर जालसाजी होगी, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और एआई के दुरुपयोग का एक नया, बेहद खतरनाक और बेहद चिंताजनक उदाहरण भी साबित होगा। यही कारण है कि मामले में दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ-साथ तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक पहलुओं की भी गहनता से जांच की मांग की जा रही है।


 इस पूरे संवेदनशील मामले पर मुंगेली के डीएफओ अभिनव कुमार का कहना है कि इस पूरे मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ बेहद कड़ी और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, चाहे उसमें कोई भी संलिप्त क्यों न हो।


 यह मामला सीधे तौर पर गरीब और वनांचल क्षेत्र के आदिवासियों के अधिकारों, शासकीय व्यवस्था की विश्वसनीयता और तकनीक के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। अब वन विभाग और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई के बाद देखना यह होगा कि जांच में क्या बड़े खुलासे होते हैं।